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झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स के डायरेक्टर का इस्तीफा, फर्जीवाड़ा मामले में CID ने की थी 7 घंटे पूछताछ

 Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
 Published : Jun 25, 2026 02:49 pm IST,  Updated : Jun 25, 2026 03:04 pm IST

रिम्स डायरेक्टर डॉ राजकुमार ने गुरुवार को इस्तीफा दे दिया। इससे पहले कल सीआईडी की टीम एडमिशन और टेंडर में फर्जीवाड़े की जांच के लिए रिम्स पहुंची थी और डायरेक्टर से 7 घंटे पूछताछ की थी।

रिम्स डायरेक्टर डॉ राजकुमार- India TV Hindi
रिम्स डायरेक्टर डॉ राजकुमार Image Source : REPORTER

​झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल 'राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान' (रिम्स) में बुधवार को सीआईडी की छापेमारी के बाद रिम्स निदेशक डॉ राजकुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सीआईडी की इस कार्रवाई ने रिम्स प्रशासन और सरकार के बीच चल रहे गतिरोध को सार्वजनिक कर दिया है। जाहिर है ​बुधवार को सीआईडी की दो टीमों ने रिम्स के डेटा सेंटर, डीन ऑफिस और प्रशासनिक विभाग में एक साथ दबिश दी। देर शाम तक चली इस कार्रवाई में सीआईडी ने कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य, फाइलें और दस्तावेज जब्त किए हैं।

सीआईडी ने रिम्स के निदेशक, डीन और चिकित्सा अधीक्षक समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों से घंटों पूछताछ भी की। ​सीआईडी मुख्य रूप से दो बड़े मामलों की जांच कर रही है।

​जांच के दायरे में ये दो बड़े मामले

​फर्जी सर्टिफिकेट पर एमबीबीएस एडमिशन: वर्ष 2025 के शैक्षणिक सत्र में एमबीबीएस और बीडीएस में एडमिशन लेने वाले चार छात्रों के जाति और विकलांगता प्रमाण पत्र फर्जी होने की शिकायत मिली है। आरोप है कि बिना प्रमाण पत्रों के भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के ही इन छात्रों को दाखिला दे दिया गया और वे प्रथम वर्ष की पढ़ाई भी कर रहे हैं।

​संदिग्ध छात्र: काजल कुमारी, आशीष कुमार, ओली विश्वकर्मा (जाति प्रमाण पत्र) और पप्पू कुमार (विकलांगता प्रमाण पत्र)।

​सफाई टेंडर में धांधली: अस्पताल की सफाई व्यवस्था के लिए निकाले गए टेंडर में नियमों को ताक पर रखकर चहेती कंपनियों को ठेका देने का गंभीर आरोप है।

​प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल

​नियम के अनुसार, किसी भी संस्थान में एडमिशन के बाद एक निश्चित समय-सीमा के भीतर जारीकर्ता प्राधिकारी (जैसे जिला प्रशासन) से मूल दस्तावेजों का सत्यापन अनिवार्य है। रिम्स प्रबंधन द्वारा एक साल बाद भी सत्यापन न कराना बड़ी प्रशासनिक चूक और मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

कौन हैं डॉ राज कुमार

बता दें कि प्रोफेसर डॉ राज कुमार जाने-माने न्यूरोसर्जन हैं और झारखंड के रांची में स्थित राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (RIMS) के डायरेक्टर और CEO थे। वे मेडिकल प्रोफेशनल हैं जिनके पास कई बड़ी डिग्रियां (B.Sc., M.B.B.S., M.S., M.Ch., Ph. D., F.R.C.S., D.Sc.) हैं। वे AIIMS ऋषिकेश के डायरेक्टर, SGPGIMS, लखनऊ में न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख और उत्तर प्रदेश यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (UPUMS) के पूर्व वाइस-चांसलर रह चुके हैं।

रिपोर्ट- मुकेश सिन्हा

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